काल्पनिक विचार व वास्तविक विचार में अनुभव के आधार पर तुलना। Experience

हेलो दोस्तों आज मैं आप सभी के लिए अनुभव के आधार पर एक पोस्ट लिखने जा रहा हूं। जो काल्पनिक विचार व वास्तविक विचार से संबंधित है।
एक गहरी विचार के रूप में यह कहा जा सकता है कि यदि व्यक्ति किसी कारणवश या फिर स्वयं से समय व्यतीत कर रहा है। अर्थात खाली बैठकर समय बिता रहा है। तब उसके मन में कई प्रकार की विचार चल रहे होते हैं। और उन विचारों को देखा जाए तो वास्तव में जो विचार उनके मन में चल रहे होते हैं।
वे ज्यादातर विचार उनके वास्तविक जीवन से बिल्कुल ही अलग होते हैं। वास्तव में वे विचार उनके मन व मस्तिष्क में काल्पनिक रूप से चल रहे होते हैं। अर्थात यह कहा जा सकता है कि खाली समय में जो विचार हमारे मन में आते हैं।



वे वास्तविक जीवन से ना होकर काल्पनिक जीवन से होते हैं।
यदि उपर्युक्त बातों को तार्किक रूप से विश्लेषण किया जाए तो हम पाएंगे की ज्यादातर विचार हमारे मन या मस्तिष्क में चलते हैं। वे ज्यादातर काल्पनिक होते हैं। लेकिन जो विचार हमारे मस्तिष्क में काल्पनिक रूप से चलते है। हम उन विचारों को वास्तविक जीवन में देखना चाहते हैं। तथा उन्हीं विचारों की भांति अपने जीवन को जीना चाहते है। लेकिन वास्तविक जीवन की सच्चाई काल्पनिक जीवन से कही अलग होती है।
असल में हमारी मनोवृत्ति में जिस प्रकार की सोच चल रही होती है। हम चाहते हैं कि वास्तविक जीवन में वैसा ही होना चाहिए।



लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता है। और कुछ समय व्यतीत हो जाने के पश्चात। हम पाते हैं कि जैसा हमारा वास्तविक जीवन होता है। और जिस प्रकार के अपने वास्तविक जीवन को देखते हैं। तो उस काल्पनिक  जीवन को छोड़ उस वास्तविक जीवन को अपना लेते हैं।
जो वास्तव में होता है। यह कहा जा सकता है मनुष्य की विचार तथा कल्पना करने की शक्ति कही ज्यादा है। जिस वजह से मनुष्य काल्पनिक जीवन जीना चाहता है।
अर्थात निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि इंसान काल्पनिक विचार के रूप में अपने जीवन को वास्तविकता से अलग कर पूर्णतः भिन्न सोचता है। उसकी काल्पनिक जीवन विचार के अनुरूप  उसके वास्तविक जीवन से कहीं ज्यादा भिन्न होती है।
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